Saturday, May 12, 2012

रतजगों से 'हर्ष' आज परेशान हो गया

______________माँ

.................एक अहसास.............

रतजगों से 'हर्ष' आज परेशान हो गया
"माँ" पे लिखा हर लफ्ज़ दीवान हो गया ।
ढूँढा किये हूँ घूंघटों में हर रूह माँ लगे ,
इक लफ्ज़ से हैवान से इंसान हो गया ।
जो लोग माँ की ममता पर भी तंज़ हैं करें
उसके प्यार से उनका भी तूफ़ान सो गया ।
याद है बचपन में माँ का गौद में उठाना
वो प्यार का अहसास अब कहाँ खो गया ।
चश्मा फिसल के नाक पर बार बार था चले
बिना किये परवाह ऊन का काम हो गया ।
जाड़े की नरम धुप में उसकी याद का स्पर्श
ना जाने कब ये शख्स बे-जान सो गया ।

_________________हर्ष महाजन ।