Tuesday, April 30, 2013

ग़ज़ल शिल्प ज्ञान - 10

:मतला : मतला क्या है ?

 ग़ज़ल के प्रथम शे'र को मतला कहते हैं |जिसके दोनों मिसरों में काफिया होता है | यही दोनों मिसरों मे काफिया न हो तो प्रथम शे'र होने के बावजूद भी शे"र को मतला नहीं कहा जाएगा | ग़ज़ल का प्रथम शे'र अमूमन/समान्यता मतला ही होता है | एक ग़ज़ल में एक से अधिक मतले भी हो सकते हैं , 'हुस्ने-मतला' कहा जाता है |
अच्छे शाइर अपनी ग़ज़ल की शुरू'आत यहीं से करता है ग़ज़ल का मतला अर्ज़ है । क़ायदे में तो मतला एक ही होता है लेकिन बाज शाइर एक से ज्‍़यादा भी मतले रखते हैं । ग़ज़ल का पहला शे'र जो कुछ भी था उसकी ही तुक आगे के शे'रों के मिसरा सानी में मिलानी है ।

उदाहरण

बहुत रहा है कभी लुत्फ़-ए-यार हम पर भी
गुज़र चुकी है ये फ़स्ल-ए-बहार हम पर भी ॥ (मतला)

ख़ता किसी कि हो लेकिन खुली जो उनकी ज़बाँ
तो हो ही जाते हैं दो एक वार हम पर भी ॥ (दूसरा शे'र) --- अकबर इलाहाबादी

काफिये ----

पहला मिसरा=यार
दूसरा मिसरा=बहार
चौथा मिसरा=वार 

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 मक्ता किसे कहते हैं ?

ग़ज़ल के अंतिम शे'र को मक्ता कहते हैं जिसमे शाईर अपना उपनाम सम्मिलित करता है | यदि ग़ज़ल के अंतिम शे'र में शाईर का उपनाम सम्मिलित न हो तो उसे भी सामान्य शे'र ही माना जाता है | उपनाम को उर्दू में 'तख़ल्लुस' कहते हैं |

जैसे हुई मुद्दत के ग़ालिब मर गया पर याद आता है,
वो हर एक बात पे कहना के यूं होता तो क्‍या होता |
अब ऊपर के शे'र में गालिब आ गया है इसका मतलब शाईर ने अपने नाम को उपयोग करके ये बताने का प्रयास किया है कि ये ग़ज़ल किसकी है ।


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सारांश


आज इस क्लास का यहाँ अंत हुआ है..उसका "सारांश" हम सबने अभी तक क्या सीखा तो हम यूँ कह सकते हैं |

@शे'र'- अगर हम यूँ कहें "दो पंक्तियों में कही गई पूरी की पूरी बात जहां पर दोनों पंक्तियों का वज्‍़न समान हो और दूसरी पंक्ति किसी पूर्व निर्धारित तुक के
साथ समाप्‍त हो."

@'मिसरा उला' -शे'र की पहली लाइन होती है
@'मिसरा सानी' -शे'र की दूसरी लाइन होती है
@मिसरा :-'मिसरा सानी' व 'मिसरा उला' का सयुंक्त शब्द
@गागर में सागर भरना मतलब शे'र कहना ।
@क़ाफिया':-वह अक्षर या शब्‍द या मात्रा को आप तुक मिलाने के लिये रखते हैं या "वो जिसको हर शे'र में बदलना है मगर उच्‍चारण समान होना चाहिये "
@रदीफ : एक शब्द जिसे पूरी ग़ज़ल मै स्थिर रहना है या वो जिसको स्थिर ही रहना है कहीं बदलाव नहीं होना है
@ रदीफ़ क़ाफिये के बाद ही होता है ।
*मतला :ग़ज़ल के पहले शे'र को कहते हैं वैसे तो मतला एक ही होगा किंतु यदि आगे का कोई शे'र भी ऐसा आ रहा है जिसमें दोनों मिसरों में काफिया है तो उसको हुस्‍ने मतला कहा जाता है
@मकता : वो शे'र जो ग़ज़ल का आखिरी शे'र होता है और अधिकांशत: उसमें शायर अपने नाम या तखल्‍लुस ( उपनाम) का उपयोग करता है । जो की जरूरी नहीं है

@प्रश्न :-
१) ग़ज़ल मै तुकांत शब्द जो है वो कुछ इस तरह से प्रयुक्त होता है
1-काफिया
२- काफिया

३- x
४- काफिया

५- x
६- काफिया

अगर इसमें कुछ अलग से है तो वो भी दर्शा सकते हैं .....ये छोटी सी सारांश की तालिका अगर आप खुद कहते तो समझते की आपने या हमने कुछ सीखा है |

सादर

हर्ष महाजन

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नोट :-


सभी तकनीकी शब्दावलियों पर महारत तभी हासिल होगी जब कई सारे शे'रों/ग़ज़लों को दिल से पढ़ा जाए उन पर तरजीह दी जाए.....कलम चलाना ज़रूरी नहीं है...अच्छी ग़ज़लों को समझ के पढ़ें...जो अब तक पढ़ा है या सीखा है वही ढूंढें ......वो नहीं जो ..अभी तक नहीं पढ़ा..|
लेकिन इंसानी फितरत वही ढूंढता है जो अभी तक नहीं मिल रहा....
यही असफलता कि कुंजी है...|
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A.कविता का स्वरुप
1.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --१
1.a
शिल्प-ज्ञान -1 a
2.ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --2 ........नज़्म और ग़ज़ल
3.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --3
4.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --4 ----कविता का श्रृंगार
5.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --५ .....दोहा क्या है ?
6.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --6
7.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --7
8.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान --8
9.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान - 911.ग़ज़ल शिल्प ज्ञान - 11
12.
ग़ज़ल शिल्प ज्ञान - 12