Tuesday, April 28, 2015

तेरी जुल्फों से नज़र मुझसे हटाई न गई



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तेरी जुल्फों से नज़र मुझसे हटाई न गई,
नम आँखों से पलक मुझसे गिराई न गई |

मैं भी था फूल कभी पर था अंधेरों में खिला,
दिल था जुल्फों में सजूँ मुझसे बताई न गई |


इक वो आवाज़ मेरे दिल से टकराती रही,
दर्द सीने में था पर मुझसे जताई न गयी |


यूँ तो ख़्वाबों में तेरी...जुल्फें लहराती रहीं,
पर दिया-बाती कभी मुझसे जलाई न गई |


अब धुंआ इतना उठा मैं भी खामोश हुआ,
आग इतनी थी जली मुझसे बुझाई न गई |


___________हर्ष महाजन