Sunday, May 10, 2015

मुद्दत से तुझे देखा ही नहीं माँ

आदाब !!!!
क्या कहूँ आज मदर्स डे है !!! सो सो नमन माँ को !! बड़े खुश नसीब हैं वो सभी शख्स जिन्हें उनका साथ नसीब है | न जाने क्यूँ ये दिन ,किस ने और क्यूँ बनाया | मेरे लिए तो ये दिन ज़ह्नीय दर्द लेकर उभर कर आता है | सच में माँ का कोई सानी नहीं | हर इस दिन को मेरा मन पता नहीं कितने भावों को जन्म देता है और न जाने कितने भाव कुकरमुत्तों की तरह इस ज़हन में दफ़न हो जाते हैं | कुछ भाव तो जुबां पर आकर वापिस अपने ख्वाब-गाह में पहुँच जाते हैं.....शायद वो मेरी कलम जब शांत होगी तो बाद में पटल पर आयें.......हे माँ ..मुद्दत से तुझे देखा ही नहीं ...???


गीत 

मुद्दत से तुझे देखा ही नहीं माँ ,
दे दे तू अब अवतार कभी,
ये दुनिया अजब निराली है,
बिछड़े यहाँ तेरे लाल सभी ......2


मुद्दत से तुझे देखा ............

जो ज्योत जली थी तुझसे माँ,
दुनियावी भी लगे रिश्ता गया |
ये लाल तेरे सब भटके हैं........2
तू दिखा अपना माँ द्वार कभी ।......2
हो सके तो आ, सुलझा दे माँ
उलझे सब दिलों के जाल सभी |
ये दुनिया अजब निराली है,
बिछड़े यहाँ तेरे लाल सभी ......2


मुद्दत से तुझे देखा ............ 


मन-मन जोड़े थे, तूने माँ,
वो प्यार की वर्षा अब कहाँ गई
हम पापी जुल्मी सब ही तो थे,
फिर भी सहे तूने खार सभी..........2
अब तरस गए तेरे दरस को माँ 

तू दिखा दे अक्स का हाल कभी
ये दुनिया अजब निराली है,
बिछड़े यहाँ तेरे लाल सभी ......2


मुद्दत से तुझे देखा ............ 

माँ तेरी नाव ही थी अपनी ,
अपनी पतवार तो थी ही नहीं,
अब अश्क रहें, अखियन में सदा,
दामन में जो ले, गमख्वार नहीं ।.....2
जब से छोड़ा तूने द्वार यहाँ ,
हासिल का कोई रखवाल नहीं |
ये दुनिया अजब निराली है,
बिछड़े यहाँ तेरे लाल सभी ......2


मुद्दत से तुझे देखा ही नहीं माँ.......

मुद्दत से तुझे देखा ही नहीं माँ,
दे दे तू अब अवतार कभी,
ये दुनिया अजब निराली है,
बिछड़े यहाँ तेरे लाल सभी .....2
मुद्दत से तुझे देखा ............


___हर्ष महाजन


हैप्पी मदर्स डे

:( :( :(